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चैत्र नवरात्रि (१८ मार्च – २5 मार्च २०१८ ), माँ की ऐसे करें पूजा- होगी हर मनोकामना पूरी

  चैत्र नवरात्रि (१८ मार्च – २5 मार्च २०१८ ) हिन्दू कैलेंडर के हिसाब से पूरे वर्ष में चार नवरात्रियाँ आती हैं । इनमे से प्रमुख चैत्र नवरात्रि एवं अश्विन मास में मनायी जाने वाली शारदीय नवरात्रि हैं । बाक़ी दोनो नवरतरियाँ गुप्त नवरतरियाँ होती हैं जो माघ मास में एवं आषाड़ मास के शुक्ल पक्ष में मनायी जाती हैं…

खरमास (१४ मार्च – १४ अप्रैल २०१८) ~ शुभ कार्य होंगे वर्जित।

  खरमास ( १५ मार्च – १४ अप्रेल ):  पूरे साल सूर्य बारह राशियों में भ्रमण करते हैं । हर एक राशि में एक महीने के लिए भ्रमण होता है । जब भी सूर्य का धनु राशि में प्रवेश एवं मीन राशि में प्रवेश होता है तब सूर्य के इस गोचर को खरमास बोला जाता है । वर्ष में पितृपक्ष…

प्रदोष व्रत ~ जानिए कैसे भगवान शिव करेंगे हर मनोकामना पूरी (14 March 2018)

Pradosh Vrat : 14 March 2018 हर माह की त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत मनाया जाता है । कृष्ण पक्ष एवं शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि के दिन भगवान शिव की आराधना की जाती है । ऐसा माना जाता है की जो एक वर्ष तक इस व्रत को कर ले तो उसके समस्त पाप धूल जाते हैं एवं चारों धामों…

पापमोचीनी एकादशी : नारायण करेंगे कई जन्मों के पापों का अंत (13.03.2018)

पापमोचीनी एकादशी :13.03.2018 चैत्र मास की कृष्ण एकादशी को पापमोचीनी एकादशी के रूप में भी मनाया जाता है । इस दिन व्रत रखने से सभी प्रकार के पापों से मुक्ति मिलती है एवं समस्त विघ्नों में विजय की प्राप्ति होती है । इस एकादशी के दिन नारायण भगवान के चतुर्भुज स्वरूप का पूजन अरचन किया जाता है । पापमोचीनी एकादशी…

गोमती चक्र और उसके सरल एवं अचूक प्रयोग

गोमती चक्र गुजरात में गोमती नदी में ज़्यादातर पाया जाता है और इसे भगवान् कृष्ण के चक्र का चिह्न भी माना जाता है।  इसकी मान्यता वैदिक और तांत्रिक पूजन दोनों में ही मानी गयी है।  दिखने में छोटा सा गोलाकार ये शंख रूपी पत्थर एक तरफ से सपाट और दूसरी तरफ से गोलाई में उठा हुआ होता है।  इसकी सपाट…

त्रयोदशी तिथि को की जाती है शिव आराधना, जानिए प्रदोष व्रत महत्व और पूजा विधि

हर महीने त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत किया जाता है. त्रयोदशी तिथि के दिन भगवान शिव की आराधना की जाती है. इस दिन व्रत करने से सभी पाप धूल जाते हैं और चारों धाम दर्शन का पुण्य मिलता है. जब दोनों पहर यानि संध्या के समय जब सूर्य अस्त हो रहा होता है एवं रात्रि का आगमन हो रहा होता…

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