दीपावली के पँच दिवसीय महापर्व की आप सभी को अनन्त शुभकामनाएँ।
कार्तिक मास की अमावस्या को दीपावली का महा निशित काल मनाया जाता है। इस वर्ष 6 नवम्बर 2026 से दीपावली का महापर्व शुरू हो रहा है जो 10 नवम्बर 2026 भाई दूज पर समाप्त होगा।
दीपावली के इस महापर्व के इन पाँच दिनो का तिथियों का विवरण निम्न प्रकार से है।
6 नवम्बर के पर्व :
धन तेरस , यम दीप, महालक्ष्मी एवं कुबेर पूजन, धनवंतरी पूजन :
त्रयोदशी तिथि : 10:30 am , 6 नवम्बर से शुरू – 10:47 am ( 7th नवम्बर २०२६) तक
प्रदोष काल : साँय 5:23 pm- 7:27 pm तक , वृषभ लग्न : साँय 5:54- रात्रि 7:53 pm तक
पूजा मुहूर्त – सायं काल : 5:54 pm – 7:53 pm
यम दीपम दान मुहूर्त : 6 नवम्बर 2026 को प्रदोष काल में साँय 5:23 pm – 6:40 pm तक
धन त्रयोदशी के दिन घर के मुख्य द्वार में यमराज के नाम का आटे से बना हुआ एक चौमुखी दीपक, घर की दक्षिण दिशा की तरफ़ प्रज्वल्लित अवश्य करें।इस दीये में सरसों का तेल डालें एवं एक सिक्का, कौड़ी, लौंग, काले तिल, खील डालें। एक थाल में घर के सदस्यों की गिनती बराबर मुट्ठी चावल ज़मीन पर डाल कर इस चौमुखी दीये को उस पर रखें एवं यमराज से प्रार्थना करें की कोई भी विपत्ति, अकाल मृत्यु या फिर किसी भी प्रकार की सेहत से संबंधित कष्ट इस घर से दूर रहें।
इस दिन घर में सुख समृद्धि प्राप्त करने के लिए बर्तन, स्वर्ण, चाँदी आदि आभूषण भी ख़रीदे जाते हैं, अगर इन्हें ख़रीदने का सामर्थ्य नहीं है तो परेशान ना हों, माता लक्ष्मी इस दिन निम्न वस्तुएँ ख़रीद कर घर लाने से अत्यंत प्रसन्न होती हैं।
कार्तिक मास की त्रयोदशी तिथि के दिन भगवान धनवंतरि अमृत कलश लेकर समुद्र मंथन से प्रकट हुए थे एवं इसलिए आज के दिन बर्तन आदि भी ख़रीदना शुभ माना जाता है। वह अच्छी सेहत के देवता भी माने जाते हैं। इसीलिए इस दिन को धन तेरस भी कहा जाता है।
इस दिन मुख्य तौर पर माता लक्ष्मी, गणपति देव, भगवान धनवंतरी एवं कुबेर देवता की पूजा का विधान है।इस दिन प्रदोष काल में १३ दीपक घर में प्रज्वल्लित करें एवं एक चौमुखी दीपक यमराज के निमित्त प्रज्वल्लित करें।
इस दिन ६ नवम्बर को धन त्रयोदशी पड़ेगी । इस दिन हस्त नक्षत्र पूरे दिन रहेगा । इस नक्षत्र में किसी भी प्रकार की ख़रीदारी करना अत्यन्त शुभ माना जाता है।
राहु काल : 10:24 am – 11:48 am ( इस समय शुभ कार्य वर्जित हैं)
संध्या दीप दान का मुहूर्त : 6 नवम्बर – 5:23 pm – 6:40 pm तक
७ नवम्बर के पर्व :
नरक चतुर्दशी / छोटी दीपावली , काली चौदस, हनुमान जयंती
चतुर्दशी तिथि : 10:47 am ( 7th नवम्बर) – 11:27 am ( 8th नवम्बर 2026)
रूप चौदस या नरक चतुर्दशी को रात्रि प्रदोष काल में घर के मुख्य द्वार में चौमुखी दिया जलाएँ। इस दिन हनुमान जी की पूजा का विशेष महत्व है, माना जाता है की इस रात्रि को नकारात्मक शक्तियाँ अत्यंत प्रबल रूप में घूमती हैं एवं हनुमान जी के पूजन एवं स्मरण से उनका नाश होता है एवं अकाल मृत्यु से मुक्ति प्राप्त होती।
हनुमान जी पूजन एवं काली चौदस रात्रि पूजन : 7 नवम्बर अर्ध रात्रि 11:23 pm – 12: 14 am (8th नवम्बर) तक
संध्या को ५:४७ बजे से लेकर साँय ७:४३ बजे तक दीप प्रज्वल्लित करने का मुहूर्त है।
काली चौदस( भूत चतुर्दशी) एवं हनुमान जयंती पूजन मुहूर्त : अर्ध रात्रि 11:39 pm ( 11th November ) – 12:32 am ( 12th November)
काली चौदस को मुख्यतः गुजरात में अर्ध रात्रि में शमशान में माँ काली एवं वीर बेताल की पूजा की जाती है। काली चौदस चतुर्थी तिथि की अर्ध रात्रि में मनायी जाती है।
बंगाल में अर्ध रात्रि माँ काली का पूजन अर्ध रात्रि में जब अमावस्या तिथि होती है तब मनायी जाती है। ये दोनो बिल्कुल अलग प्रकार के पूजन व्यवस्था हैं। इस वर्ष ८ नवम्बर की अर्ध रात्रि को बंगाल में माँ काली का पूजन किया जाएगा।
हनुमान जयंती का पूजन भी चतुर्दशी तिथि को काली चौदस के साथ मनाया जाता है। अयोध्या जी के हनुमानगड़ी में हनुमान जयंती का विशेष उत्सव इस रात्रि को मनाया जाता है।
नरक चतुर्दशी तिथि अभ्यंग स्नान ( तिल के तेल से ऊबटन बना कर लगाएँ फिर स्नान करें) :
अभ्यंग स्नान का विशेष महत्व नरक चतुर्दशी, अमावस्या को माना जाता है। इस स्नान को नरक चतुर्दशी को करने का विशेष विधान है एवं अत्यंत शुभ माना जाता है। स्नान में तिल का ऊबटन लगा कर फिर स्नान करने से कष्टों से मुक्ति मिलती है।
अभ्यंग स्नान मुहूर्त, 8 नवम्बर को प्रातः काल 5:16 am से प्रातः 6:14 am तक मुहूर्त रहेगा।
अभ्यंग स्नान का मुहूर्त इस वर्ष दीपवाली वाले दिन प्रातः काल में पड़ेगा। शास्त्रों के अनुसार, जब भी चतुर्दशी तिथि सूर्योदय से पहले एवं उसी दिन सूर्य अस्त के पश्चात अगर अमावस्या पड़ती है तो नरक चतुर्दशी में अभ्यंग स्नान एवं दीपवाली एक ही दिन मनाई जाती है।
महादीपावली पर्व पूजन मुहूर्त : 8 नवम्बर 2026
दीपावाली की रात्रि को दीप प्रज्वल्लित कर माँ महालक्ष्मी जी का पूजन गणपति देव के साथ किया जाता है। ऐसा माना जाता है की इस दिन माता लक्ष्मी धरती पर विचरण करती हैं एवं अपने भक्त जनों की मनोकामनाओं को पूर्ण करती हैं।
लक्ष्मी पूजा का सबसे उत्तम पूजन मुहूर्त प्रदोष काल में स्थिर लग्न में माना जाता है। व्यापारी आदि के लिए दोपहर का समय लक्ष्मी पूजन के लिए बेहतर होता है। अर्ध रात्रि को महा लक्ष्मी जी के पूजन एवं हवन का विशेष महत्व होता है एवं इस समय की गयी पूजा यंत्र तंत्र एवं मंत्र की शक्ति जागृत होती हैं।
गृहस्थ लोगों के लिए प्रदोष काल में किया गया पूजन उत्तम होता है।
प्रदोष काल माँ लक्ष्मी पूजन मुहूर्त : 5:47 pm – 7:45 pm
प्रदोष काल : 5:22 pm – 7:57 pm
वृषभ काल : 5:47 pm – 7:45 pm ( स्थिर लग्न)
दीपवाली के दिन पूजा के लिए शुभ चौघड़िया मुहूर्त :
राहू काल : साँय 3:59 pm से साँय 5:22 pm तक ( इस समय कोई भी शुभ कार्य करना टालें)
इस दिन चोपड़ा पूजन एवं माँ शारदा का पूजन भी बहुत विधि विधान से किया जाता है।ज्ञान एवं बुद्धि के बिना धन एवं ऐश्वर्य व्यर्थ हो जाते हैं इसीलिए इस दिन माता लक्ष्मी के साथ देवी सरस्वती का पूजन भी करना चाहिए। दीपावली की संध्या प्रदोष काल में माता लक्ष्मी, गणपति देव एवं माँ सरस्वती के पूजन से विशेष शुभ फल मिलता है एवं जीवन में सुख समृद्धि के शुभ संयोग भी बनते जाते हैं।
इस पूरे पंचदिवसों में माता महालक्ष्मी के पूजन का विधान है एवं इन्हें गणपति, माता सरस्वती , कुबेर देव, धन्वंतरि एवं भगवान विष्णु के साथ पूजा जाता है।
भगवान राम के रावण वध के पश्चात, १४ वर्ष के वनवास के बाद, अयोध्या वापसी के उपलक्ष्य में में भी दीप प्रज्वल्लित किए जाते हैं।
ये पंचदिवसीय महापर्व निम्न प्रकार से हैं :
१ : धन तेरस / धन त्रयोदशी : ६ नवम्बर
१० नवम्बर को धन तेरस पड़ेगा। इस दिन धन रक्षक कुबेर देव की पूजा का विधान है। साथ ही में भगवान धनवांतरि ( जो सेहत के देवता हैं एवं समुद्र मंथन के समय अमृत के साथ प्रकट हुए थे) उनका पूजन भी किया जाता है।
इस दिन संध्या के समय घर के मुख्य द्वार में दोनो तरफ़ दीप प्रज्वलित करें। पूजन स्थान पर कुबेर देवता को उत्तर दिशा पर स्थापित करें एवं भगवान गणपति, भगवान धनवांतरि, कुबेर देव, माता लक्ष्मी का स्मरण कर पूजन करें तो वर्ष भर में सुख समृद्धि बनी रहती है एवं समस्त परिवारजन की अच्छी सेहत रहती है। पूजन सामग्री में पीली वस्तुएँ जैसे पीले फूल, हल्दी, पीले चावल, पीला चंदन, लड्डू आदि भोग में अर्पित कर सकते हैं।
इस दिन स्वर्ण, आभूषण आदि ख़रीदने का विधान है एवं घर के लिए नए बर्तन आदि भी ख़रीदे जाते हैं। आज सबूत धनिया एवं गुड को प्रसाद स्वरूप भी चडाया जाता है।
धन तेरस में पूजन समय उपरोक्त लिखा है :
निम्न मंत्रों का १०८ बार अवश्य करें जप :
” ॐ धनवांतराय नमः ” ,
“ॐ धनकुबेराय नमः” / “ॐ वित्तेश्वराय नमः “
“ॐ श्रीं श्रिये नमः “
ॐ ह्रीं श्रीं क्रीं श्रीं कुबेराय अष्ट-लक्ष्मी मम गृहे धनं पुरय पुरय नमः॥
धनतेरस पूजा को धनत्रयोदशी के नाम से भी जाना जाता है। धनतेरस का दिन धनवंतरि त्रयोदशी, जो कि आयुर्वेद के देवता का जन्म दिवस है, के रूप में भी मनाया जाता है।
यम दीपम : इसी दिन असामयिक मृत्यु से बचने के लिए यमराज के लिए घर के बाहर दीपक जलाया जाता है जिसे यम दीपम के नाम से जाना जाता है और इस धार्मिक संस्कार को त्रयोदशी तिथि के दिन दक्षिण दिशा में किया जाता है।
घर में मुख्य द्वार पर यमराज के नाम का एक दीप अवश्य जलाएँ। उसमें एक सिक्का, कौड़ी, हल्दी,काले तिल गोमती चक्र डाल कर दीप प्रज्वल्लित करें।
काली चौदस एवं हनुमान जयंती पूजन मुहूर्त : अर्ध रात्रि 11:23 pm ( 8 th November ) – 12:14 am ( 9th November)
२ : नरक चतुर्दशी / छोटी दीपावली :
8 नवम्बर को नरक चतुर्दसी, रूप चौदस या छोटी दीपावली मनाई जाएगी।
नरक चतुर्दशी/ रूप चौदस की पौराणिक कथा :
इस दिन श्री कृष्ण ने नर्कसुर का वध कर सभी को उसके द्वारा किए गए नरक स्वरूप पापों से मुक्ति दिलवायी थी। नरकासुर ने १६००० युवतियों को अपने अधीन बंदी बना कर रखा था जिन्हें श्री कृष्ण ने नरकासुर का वध कर मुक्त किया। उनसे औपचारिक विवाह कर उन्हें समाज में सम्मान की स्तिथी दिलायी।
इसी उपलक्ष्य में इस दिन दीप दान की विशेष परम्परा है।
आज रात्रि को यमराज के अलावा श्री काल भैरव की भी पूजा की जाती है। काल भैरव, शिव जी का रौद्र स्वरूप हैं। समस्त काशी इन्हें के अधीन है। घर में दीप प्रज्वल्लित कर सभी देवी देवताओं का आहवाहन कर पूजन करें। शिव जी पर चावलकी खीर भी अर्पित करें।
३ : दीपावली महा रात्रि : 8 नवम्बर 2026
दीपावली के महापर्व की मुख्य रात्रि 8 नवम्बर की रात्रि को मनायी जाएगी। यह दिन समस्त विघ्नों को दूर करने वाली रात्रि है एवं माता लक्ष्मी का विधिवत पूजन करने से जीवन में अष्ट लक्ष्मी का आशीर्वाद प्राप्त होता है एवं पूरे वर्ष भर में घर परिवार में सुख समृद्धि बनी रहेगी।
रात्रि के महा निशित काल में माता लक्ष्मी के पूजन का विशेष विधान है। उनके नाम का हवन करना एवं मंत्रों द्वारा विधिवत जप करने से माता लक्ष्मी की कृपा समस्त परिवार में बनी रहती है। गणपति एवं माता लक्ष्मी के साथ श्री हरी विष्णु जी, माँ सरस्वती, माँ काली, हनुमान जी एवं शिव जी के पूजन का भी विधान है।
पूजन मुहूर्त : इस ब्लॉग की शुरुआत में, उपरोक्त लिखा हुआ है।
४ : गोवर्धन पूजन : 10 नवम्बर
दीपावली के चौथे दिन गोवर्धन पूजन किया जाता है। कार्तिक शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा को गोवर्धन पूजन होता है। इस दिन भगवान कृष्ण का इंद्र देव पर विजय के उपलक्ष्य में पूजन किया जाता है।
गोवर्धन पूजा को अन्नकूट पूजन भी कहा जाता है। इस दिन गेहूँ, चावल जैसे अनाज, बेसन से बनी कढ़ी और पत्ते वाली सब्जियों से बने भोजन को पकाया जाता है और भगवान कृष्ण को अर्पित किया जाता है।
भगवान विष्णु की राजा बाली पर विजय उनके वामन अवतार द्वारा हुई थी। इसके पश्चात बाली को पाताल लोक में वास करना पड़ा था। यह माना जाता है कि भगवान वामन द्वारा दिए गए वरदान के कारण असुर राजा बालि इस दिन पातल लोक से पृथ्वी लोक आता है।
इसी दिन गुजराती नव वर्ष भी पड़ता है।
५ : भाई दूज/ यम द्वितीया : 11 नवम्बर 2023
कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को भाई दूज मनाया जाता है| इसे यम द्वितीया भी कहा जाता है|
पौराणिक कथा अनुसार यमराज ने अपने बहन यमुना को वचन दिया था कि जो भी भाई इस दिन अपने बहन के घर जा कर भोजन ग्रहण करेगा वह उनके संरक्षण में रहेगा एवं उसकी आकाल मृत्यु कभी नहीं होगी। यह पर्व भाई बहन के प्रेम का प्रतीक है ।
भाई दूज तिलक मुहूर्त – दोपहर 12:55 pm बजे से 3:08 pm तक
एक और पौराणिक कथा अनुसार, श्री कृष्ण नरकासुर का वध कर इसी दिन यानी कार्तिक शुक्ल द्वितीया को द्वारका पहुँचे, इसी उपलक्ष्य में उनकी बहन सुभद्रा ने उन्हें तिलक लगा, फूल छड़ा कर, आरती कर, कर उनका स्वागत किया। तभी से इस दिन भाई के मस्तक में तिलक लगाने की प्रथा चली है।
दीपावली में और भी कई निवारण आदि किए जाते हैं। आप हमारे youtube channel में उनसे सम्बंधित विडीओ देख सकते हैं, जो आपके घर में सुख समृद्धि, यश वैभव लेकर आएँगे।
आपके एवं आपके परिवार पर माता लक्ष्मी एवं गणपति की विशेष कृपा बरसे एवं जीवन में सुख समृद्धि से परिपूर्ण हो।
नन्दिता पाण्डेय – ज्योतिषाचर्या
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